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जयसिंगास पत्र • अध्याय 1 • श्लोक 13
वले तू जे औरंगजेब आमदी। वहगंवाय जाहिद फरेवं आमदी ॥
पर तू तो औरंगजेब की ओर से (उस) भद्रजनों के धोखा देने वाले के बहकाने में पड़कर आया है।
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