जहाँ आफरीनद निगहदार वाद।
तुरा रहनुमायद सुरा दीनो दाद ॥
जगत् का जनक तेरा रक्षक हो (तथा) तुझको धर्म एवं न्याय का मार्ग दिखावे।
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