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जयसिंगास पत्र • अध्याय 1 • श्लोक 74
दो दिल यक शवद् वेशकुनद कोहरा । परागंदगी आख अंवोहरा ॥
दो हृदय (यदि) एक हो जायँ तो पहाड को तोड सकते हैं (तथा) समूह के समूह को तितिर बितिर कर दे सकते हैं।
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