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अध्याय 101 — अथ नक्षत्रजातकाष्यायः

बृहत्संहिता
14 श्लोक • केवल अनुवाद
जिस मनुष्य का अधिनी नक्षत्र में जन्म हो, वह अलङ्करण का स्नेही, सुन्दर, सथों का प्रिय, सब कार्य करने में चतुर और बुद्धिमान होता है। चरणों नक्षत्र में उत्पन्न जातक जिए कार्य का प्रारम्भ करे, उसको सिद्ध करने वाला, सत्य बोलने कत्ता, नीरोग, चतुर और सुखी होता है।
कृतिका नक्षत्र में उत्पत्र जातक बहुत भोजन करने वाला, दूसरों की खियों के साथ रमण करने वाला, तेजस्वी (किसी का नहीं सहने वाला) और विख्यात होता है। रोहिणी नक्षत्र में उत्पत्र जातक सत्य बोलने माला, पवित्र, प्रिय बोलने वाला, स्थिर बुद्धि वाला और सुन्दर रूप बाता होता है।
मृगशिरा में उत्पन्न जातक चञ्चल, चतुर, भय से पीड़ित, पटु, उत्साही, घनी और भोगी होता है। आर्द्रा नक्षत्र में उत्पन्न जातक शठ (परोपकार से रहित), अभिमानी, दूसरे के कृत्यों का नाश करने वाला, जन्तुओं का वध करने वाला और पापी होता, है।
पुनर्वसु नक्षत्र में उत्पत्र जातक इन्द्रियों को वश में रखने वाला, सुखी, सुन्दर स्वभाव वाला, दुर्बुद्धि, रोगी, तृष्णा से युत और थोड़े हो से प्रसन्न होने वाला होता है।
पुष्य नक्षत्र में उत्पन्न जातक शान्त प्रकृति वाला, सबों का प्रिय, पण्डित, धनी और धर्म से युत होता है। आश्लेषा में उत्पन्न जातक शठ, खाद्य और अखाद्य सबों को खाने वाला, पापी, अन्य के कृत्यों को नाश करने वाला एवं धूर्त होता है।
मघा नक्षत्र में उत्पत्र जातक बहुत मृत्य और धन से युक्त, भोगी, देवता तथा पितर में भक्ति करने वाला और अत्यन्त उद्यमी होता है। पूर्वाफाल्गुनी में उत्पन्न जातक प्रिय बचन बोलने वाला, दानी, कान्ति से युक्त, भ्रमण करने वाला और राजाओं का सेवक होता है।
उत्तरफाल्गुनी नक्षत्र में उत्पन्न जातक सबों का प्रिय, विद्या से धनोपार्जन करने वाला, भोगी और सुखी होता है। हस्त नक्षत्र में उत्पन्न जातक उत्साही, प्रतिभा से युक्त, निर्लज्ज, मद्यपान करने वाला, अघृणी (निर्दयी) और तस्कर (चोर) होता है।
चित्रा नक्षत्र में उत्पन्न जातक अनेक रंग के वस्त्र और माला को धारण करने वाला, सुन्दर नेत्र और सुन्दर शरीर वाला होता है। स्वाती नक्षत्र में उत्पन्न जातक इन्द्रियों को वश में रखने वाला, व्यापार करने वाला, दयालु, प्रिय बोलने वाला और धर्म के आश्रय में रहने वाला होता है।
विशाखा नक्षत्र में उत्पत्र जातक दूसरे की उन्नति में मत्सर, कन्तिमान, बोलने में चतुर और झगड़ालू होता है। अनुराधा नक्षत्र में उत्पन्न जातक धनवान, परदेश में रहने वाला, अधिक क्षुधा से पीड़ित और भ्रमण करने वाला होता है।
ज्येष्ठा नक्षत्र में उत्पत्र जातक अधिक मित्रों से रहित, सन्तुष्ट, धर्म करने वाला और अधिक क्रोध करने वाला होता ती है। है। मूल नक्षत्र में उत्पत्र जातक मानी, धनवान, सुखी, हिंसा कर्म से रहित, स्थिर बुद्धि वाला और भोगी होता है।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में उत्पन्न जातक अपने अभीष्ट आनन्द देने वाली स्त्री से युत, अभिमानी और अच्छे मित्रों से युत होता है। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में उत्पन्न जातक विशेष नम्र स्वभाव वाला, धार्मिक, बहुत मित्रों से युत, दूसरे से किये गये उपकार को मानने वाला और सबका प्रिय होता है।
श्रवण नक्षत्र में उत्पन्न जातक श्रीमान्, पण्डित, उदार, स्त्री से युत, धनी और विख्यात होता है। घनिष्ठा नक्षत्र में उत्पत्र जातक दानी, धनी, गीत-वाद्यादि का प्रेमी और लोभी होता है।
शतभिषा नक्षत्र में उत्पन्न जातक स्पष्ट बोलने वाला, अनेक व्यसन में आसक्त, शत्रुओं का नाश करने वाला, साहसी और कष्ट से किसी के वश में आने वाला होता है। पूर्वभाद्र में उत्पन्न जातक दुःखित चित्त वाला, खी के वश में रहने वाला, धनी, पण्डित और कृपण होता है।
उत्तरभाद्रपदा में उत्पन्न जातक वक्ता, सुखी, सन्तति से युक्त, शत्रुओं को जोतने बाला और धर्माचरण करने वाला होता है। रेवती नक्षत्र में उत्पत्र जातक सम्पूर्ण अंगों से युक्त, सबका प्रिय, पवित्र और धनवान होता है।
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