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बृहत्संहिता • अध्याय 101 • श्लोक 5
शान्तात्मा सुभगः पण्डितो धनी धर्मसंश्रितः पुष्ये । शठसर्वभक्ष्यपापः कृतघ्नघूर्तश्च भौजङ्गे ॥
पुष्य नक्षत्र में उत्पन्न जातक शान्त प्रकृति वाला, सबों का प्रिय, पण्डित, धनी और धर्म से युत होता है। आश्लेषा में उत्पन्न जातक शठ, खाद्य और अखाद्य सबों को खाने वाला, पापी, अन्य के कृत्यों को नाश करने वाला एवं धूर्त होता है।
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