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बृहत्संहिता • अध्याय 101 • श्लोक 2
बहुभुक् परदाररतस्तेजस्वी कृत्तिकासु विख्यातः । रोहिण्यां सत्यशुचिः प्रियंवदः स्थिरः स्वरूपच ॥
कृतिका नक्षत्र में उत्पत्र जातक बहुत भोजन करने वाला, दूसरों की खियों के साथ रमण करने वाला, तेजस्वी (किसी का नहीं सहने वाला) और विख्यात होता है। रोहिणी नक्षत्र में उत्पत्र जातक सत्य बोलने माला, पवित्र, प्रिय बोलने वाला, स्थिर बुद्धि वाला और सुन्दर रूप बाता होता है।
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