मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 101 • श्लोक 13
स्फुटवाग्व्यसनी रिपुहा साहसिकः शतभिषक्सु दुर्गाह्यः । स्त्रीजितधनपटुरदाता भद्रपदासूद्विग्नः च ॥
शतभिषा नक्षत्र में उत्पन्न जातक स्पष्ट बोलने वाला, अनेक व्यसन में आसक्त, शत्रुओं का नाश करने वाला, साहसी और कष्ट से किसी के वश में आने वाला होता है। पूर्वभाद्र में उत्पन्न जातक दुःखित चित्त वाला, खी के वश में रहने वाला, धनी, पण्डित और कृपण होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें