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बृहत्संहिता • अध्याय 101 • श्लोक 4
दान्तः सुखी सुशीलो दुर्मेधा रोगभाक् पिपासुश्च । अल्पेन च सन्तुष्टः पुनर्वसौ जायते मनुजः ॥
पुनर्वसु नक्षत्र में उत्पत्र जातक इन्द्रियों को वश में रखने वाला, सुखी, सुन्दर स्वभाव वाला, दुर्बुद्धि, रोगी, तृष्णा से युत और थोड़े हो से प्रसन्न होने वाला होता है।
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