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बृहत्संहिता • अध्याय 101 • श्लोक 3
चपलश्चतुरो भीरुः पटुरुत्साही धनी मृगे भोगी। • शठगर्वितचण्डकृतघ्नहिंस्रपापश्च रौद्रर्थे ॥
मृगशिरा में उत्पन्न जातक चञ्चल, चतुर, भय से पीड़ित, पटु, उत्साही, घनी और भोगी होता है। आर्द्रा नक्षत्र में उत्पन्न जातक शठ (परोपकार से रहित), अभिमानी, दूसरे के कृत्यों का नाश करने वाला, जन्तुओं का वध करने वाला और पापी होता, है।
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