ज्येष्ठासु न बहुमित्रः सन्तुष्टो धर्मकृत् प्रचुरकोपः । मूले मानी धनवान् सुखी न हिंस्रः स्थिरो भोगी ॥
ज्येष्ठा नक्षत्र में उत्पत्र जातक अधिक मित्रों से रहित, सन्तुष्ट, धर्म करने वाला और
अधिक क्रोध करने वाला होता ती है। है। मूल नक्षत्र में उत्पत्र जातक मानी, धनवान, सुखी,
हिंसा कर्म से रहित, स्थिर बुद्धि वाला और भोगी होता है।
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