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बृहत्संहिता • अध्याय 101 • श्लोक 12
श्रीमान् श्रवणे श्रुतवानुदारदारो धनान्वितः ख्यातः । दाता ऽऽ क्यशूरगीतप्रियो धनिष्ठासु धनलुब्धः ॥
श्रवण नक्षत्र में उत्पन्न जातक श्रीमान्, पण्डित, उदार, स्त्री से युत, धनी और विख्यात होता है। घनिष्ठा नक्षत्र में उत्पत्र जातक दानी, धनी, गीत-वाद्यादि का प्रेमी और लोभी होता है।
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