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बृहत्संहिता • अध्याय 101 • श्लोक 14
वक्ता सुखी प्रजावान् जितशत्रुर्धार्मिको द्वितीयासु । सम्पूर्णाङ्गः सुभगः शूरः शुचिरर्थवान् पौष्णो ॥
उत्तरभाद्रपदा में उत्पन्न जातक वक्ता, सुखी, सन्तति से युक्त, शत्रुओं को जोतने बाला और धर्माचरण करने वाला होता है। रेवती नक्षत्र में उत्पत्र जातक सम्पूर्ण अंगों से युक्त, सबका प्रिय, पवित्र और धनवान होता है।
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