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बृहत्संहिता • अध्याय 101 • श्लोक 9
ईर्षुर्लुब्यो सुतिमान् वचनपटुः कलहकृद्विशाखासु । आढ्यो विदेशवासी क्षुयालुरटनोऽनुराधासु ॥
विशाखा नक्षत्र में उत्पत्र जातक दूसरे की उन्नति में मत्सर, कन्तिमान, बोलने में चतुर और झगड़ालू होता है। अनुराधा नक्षत्र में उत्पन्न जातक धनवान, परदेश में रहने वाला, अधिक क्षुधा से पीड़ित और भ्रमण करने वाला होता है।
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