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बृहत्संहिता • अध्याय 101 • श्लोक 11
इष्टानन्दकलत्रो वीरो दृढसौहृदश्च जलदेवे । वैश्वे विनीतधार्मिकबहुमित्रकृतज्ञसुभगश्च ॥
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में उत्पन्न जातक अपने अभीष्ट आनन्द देने वाली स्त्री से युत, अभिमानी और अच्छे मित्रों से युत होता है। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में उत्पन्न जातक विशेष नम्र स्वभाव वाला, धार्मिक, बहुत मित्रों से युत, दूसरे से किये गये उपकार को मानने वाला और सबका प्रिय होता है।
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