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अध्याय 1 — पहला अध्याय
चाणक्य नीति
17 श्लोक • केवल अनुवाद
तीनों लोक के स्वामी, सर्वशक्तिमान, भगवान विष्णु को नमन करते हुए, मैं एक राज्य के लिए नीति शास्त्र के सिद्धांतों को कहता हूँ। मैं यह सूत्र अनेक शास्त्रों का आधार ले कर कह रहा हूँ।
जो व्यक्ति शास्त्रों के सूत्रों का अभ्यास करके, ज्ञान ग्रहण करेगा, उसे अत्यंत वैभवशाली कर्तव्य के सिद्धांत ज्ञात होगे। उसे इस बात का पता चलेगा, कि किन बातों का अनुसरण करना चाहिए, और किनका नहीं। उसे अच्छाई और बुराई का भी ज्ञात होगा, और अंततः उसे सर्वोत्तम का भी ज्ञान होगा।
इसलिए लोगों का भला करने के लिए, मैं उन बातों को कहूंगा जिनसे लोग सभी चीजों को सही परिपेक्ष्य में देखेंगे।
एक पंडित भी घोर कष्ट में आ जाता है यदि वह किसी मूर्ख को उपदेश देता है, यदि वह एक दुष्ट पत्नी का पालन-पोषण करता है या किसी दुखी व्यक्ति के साथ अत्यंत घनिष्ठ सम्बन्ध बना लेता है.
दुष्ट पत्नी, झूठा मित्र, बदमाश नौकर और सर्प के साथ निवास साक्षात मृत्यु के समान है।
व्यक्ति को आने वाली मुसीबतों से निबटने के लिए, धन संचय करना चाहिए। उसे धन-सम्पदा त्यागकर भी पत्नी की सुरक्षा करनी चाहिए। लेकिन यदि आत्मा की सुरक्षा की बात आती है, तो उसे धन और पत्नी दोनों को तुक्ष्य समझना चाहिए।
भविष्य में आने वाली मुसीबतों के लिए धन एकत्रित करें। ऐसा ना सोचें की धनवान व्यक्ति को मुसीबत कैसी जब धन साथ छोड़ता है तो संगठित धन भी तेजी से घटने लगता है।
उस देश में निवास न करें जहाँ आपकी कोई इज्जत नहीं हो, जहां आप रोजगार नहीं कमा सकते, जहां आपका कोई मित्र नहीं और जहां आप कोई ज्ञान अर्जित नहीं कर सकते।
ऐसे जगह एक दिन भी निवास न करें जहाँ निम्नलिखित पांच ना हो - एक धनवान व्यक्ति, एक ब्राह्मण जो वैदिक शास्त्रों में निपुण हो, एक राजा, एक नदी, और एक चिकित्सक।
बुद्धिमान व्यक्ति को ऐसे देश में कभी नहीं जाना चाहिए जहाँ रोजगार कमाने का कोई माध्यम ना हो, जहाँ लोगों को किसी बात का भय न हो, जहाँ लोगो को किसी बात की लज्जा न हो, जहाँ लोग बुद्धिमान न हो, और जहाँ लोगों की वृत्ति दान धर्म करने की ना हो।
नौकर की परीक्षा तब करें जब वह कर्तव्य का पालन न कर रहा हो, रिश्तेदार की परीक्षा तब करें जब आप मुसीबत में घिरे हो, मित्र की परीक्षा विपरीत परिस्थितियों में करें, और जब आपका वक्त अच्छा न चल रहा हो तब पत्नी की परीक्षा करें।
अच्छा मित्र वही है जो हमें निम्नलिखित परिस्थितियों में नहीं त्यागे आवश्यकता पड़ने पर, किसी दुर्घटना पड़ने पर, जब अकाल पड़ा हो, जब युद्ध चल रहा हो, जब हमें राजा के दरबार में जाना पड़े, और जब हमें शमशान घाट जाना पड़े।
जो व्यक्ति कसी नाशवंत चीज के लिए कभी नाश नहीं होने वाली चीज को छोड़ देता है, तो उसके हाथ से अविनाशी वस्तु तो चली ही जाती है और इसमें कोई संदेह नहीं की नाशवान को भी वह खो देता है।
एक बुद्धिमान व्यक्ति को किसी इज्जतदार घर की अविवाहित कन्या से किस वयग होने के बावजूद भी विवाह करना चाहिए। उसे किसी हीन घर की अत्यंत सुन्दर स्त्री से भी विवाह नहीं करनी चाहिए। शादी-विवाह हमेशा बराबरी के घरों में ही उचित होता है।
इन ५ पर कभी विश्वास ना करें: १. नदियां २. जिन व्यक्तियों के पास अश्त्र-शस्त्र हो ३. नाखून और सींग वाले पशु ४. औरतें (यहाँ संकेत भोली सूरत की तरफ है, बहने बुरा न माने) ५. राज घरानों के लोग
अगर हो सके तो विष में से भी अमृत निकाल लें, यदि सोना गन्दगी में भी पड़ा हो तो उसे उठाये, धोएं और अपनायें, निचले कुल में जन्म लेने वाले से भी सर्वोत्तम ज्ञान ग्रहण करें, उसी तरह यदि कोई बदनाम घर की कन्या भी महान गुणों से सम्पन्न है और आपको कोई सीख देती है तो ग्रहण करें।
महिलाओं में पुरुषों कि अपेक्षा भूख दो गुना, लज्जा चार गुना, साहस छ गुना, और काम आठ गुना होती है।
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