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चाणक्य नीति • अध्याय 1 • श्लोक 14
वरयेत्कुलजां प्राज्ञो विरूपामपि कन्यकाम् । रूपीला न नीचस्य विवाहः सदो कुले ।।
एक बुद्धिमान व्यक्ति को किसी इज्जतदार घर की अविवाहित कन्या से किस वयग होने के बावजूद भी विवाह करना चाहिए। उसे किसी हीन घर की अत्यंत सुन्दर स्त्री से भी विवाह नहीं करनी चाहिए। शादी-विवाह हमेशा बराबरी के घरों में ही उचित होता है।
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