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चाणक्य नीति • अध्याय 1 • श्लोक 16
विषादप्यमृतं ग्राह्यममेध्यादपि काञ्चनम् । नीचादप्युत्तमा विद्यास्त्रीरत्नं दुष्कुलादमि ।।
अगर हो सके तो विष में से भी अमृत निकाल लें, यदि सोना गन्दगी में भी पड़ा हो तो उसे उठाये, धोएं और अपनायें, निचले कुल में जन्म लेने वाले से भी सर्वोत्तम ज्ञान ग्रहण करें, उसी तरह यदि कोई बदनाम घर की कन्या भी महान गुणों से सम्पन्न है और आपको कोई सीख देती है तो ग्रहण करें।
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