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चाणक्य नीति • अध्याय 1 • श्लोक 4
मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च। दुःखिते सम्प्रयोगेण पण्डितोऽप्यवसीदति ।।
एक पंडित भी घोर कष्ट में आ जाता है यदि वह किसी मूर्ख को उपदेश देता है, यदि वह एक दुष्ट पत्नी का पालन-पोषण करता है या किसी दुखी व्यक्ति के साथ अत्यंत घनिष्ठ सम्बन्ध बना लेता है.
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