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चाणक्य नीति • अध्याय 1 • श्लोक 5
दुष्टाभार्या शठं मित्रं भृत्यश्चोत्तरदायकः । संसर्प च गृहे वासो मृत्युरेव नः संशयः ।।
दुष्ट पत्नी, झूठा मित्र, बदमाश नौकर और सर्प के साथ निवास साक्षात मृत्यु के समान है।
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