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चाणक्य नीति • अध्याय 1 • श्लोक 7
आपदार्थे धनं रक्षेच्छ्रीमतां कुत आपदः । कदाचिच्चलते लक्ष्मीसंचितोऽपिविनश्यति ।।
भविष्य में आने वाली मुसीबतों के लिए धन एकत्रित करें। ऐसा ना सोचें की धनवान व्यक्ति को मुसीबत कैसी जब धन साथ छोड़ता है तो संगठित धन भी तेजी से घटने लगता है।
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