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चाणक्य नीति • अध्याय 1 • श्लोक 10
लोकयात्रा भयं लज्जा दाक्षिण्यं त्यागशीलता । पञ्च यत्र न विद्यन्ते न कुर्यात्तत्रसगतिम् ।।
बुद्धिमान व्यक्ति को ऐसे देश में कभी नहीं जाना चाहिए जहाँ रोजगार कमाने का कोई माध्यम ना हो, जहाँ लोगों को किसी बात का भय न हो, जहाँ लोगो को किसी बात की लज्जा न हो, जहाँ लोग बुद्धिमान न हो, और जहाँ लोगों की वृत्ति दान धर्म करने की ना हो।
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