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चाणक्य नीति • अध्याय 1 • श्लोक 8
यस्मिन् देशे न सम्मानो न वृत्तिर्न च बान्धवः । नच विद्यागमऽप्यस्तिवासस्तत्रन कारयेत् ।।
उस देश में निवास न करें जहाँ आपकी कोई इज्जत नहीं हो, जहां आप रोजगार नहीं कमा सकते, जहां आपका कोई मित्र नहीं और जहां आप कोई ज्ञान अर्जित नहीं कर सकते।
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