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अध्याय 85 — अथ दन्तकाष्ठलक्षणाध्यायः

बृहत्संहिता
9 श्लोक • केवल अनुवाद
बल्ली, लता, गुल्म और वृक्षों के भेद से हजारों प्रकार के दतलून (दातून) होते हैं। जिनसे फल कहे जाते हैं, उनके प्रसंग को अधिक न बढ़ाकर केवल अभीष्ट फल देने वाले दतवन को कहते हैं।
अपरिचित पत्तों से युत, युग्म (दो आदि) पर्षों में युत, फटा हुआ, वृक्ष पर हो सूखा हुआ यह त्वचा से रहित दतवन नहीं करना चाहिये।
बैकङ्कत, नारियल और काश्मरी (गम्भारी) वृक्ष का दन्तपावन करने से जाही पुति का लाभ, प्रेम वृक्ष का दन्तधावन करने से उत्तम स्त्री का लाभ, वटवृक्ष का दन्तधावन करने से घर को मुद्धि के कदापन करने से बहुत तेजलाभ, महुये के मूल का दन्तधावन करने से पुक्लाम और अर्जुन वृक्ष का दन्तपावन करने में ज के प्रिया का लाभ होता है।
शिरीष और करन वृक्ष का दन्तधावन करे तो लक्ष्मी की प्राप्ति, पाकड़ के वृक्ष का दन्तधावन करे तो अभीष्ट अर्थ की सिद्धि, चमेली वृक्ष का दन्तधावन करे तो मान का लाभ और पीपल के वृक्ष का दन्तधावन करे तो प्रधानता की प्राप्ति होती है।
बेर और कटेरी वृक्ष का दन्तधावन करे तो आरोग्य और दीर्घायु का लाभ, खैर और बेल वृक्ष का दन्तधावन करे तो ऐश्वर्य को वृद्धि, तेंदुआ (तिनिस) वृक्ष का दन्तधावन करे तो अभीष्ट द्रव्यों का लाभ और कदम्ब वृक्ष का दन्तधावन करे तो भी अभीष्ट द्रव्यों का लाभ होता है।
नौम के वृक्ष का दन्तपावन करे तो धन का लाभ, करवीर (कनेर) के वृछ का दन्तधावन करे तो अत्र का लाभ, भाण्डौर वृक्ष का दन्तधावन करे तो इसी तरह अधिक अत्र का लाभ, शमी वृक्ष का दन्तपावन करे तो शत्रुओं को मारने वाला, अर्जुन वृक्ष का दन्तधावन करे तो भी शत्रुओं का नाश करने वाला और श्यामा के वृक्ष का दन्तपावन करे तो भी शत्रु को ही मारने वाला होता है।
शाल और अवकर्ण का दन्तधावन सम्मान को बढ़ाने वाला, देवदारू और यासिका के वृक्ष का दन्तधावन भी सम्मान को बढ़ाने वाला तथा प्रियङ्गु, अपामार्ग, जामुन और दाडिम के वृक्ष का दन्तधावन चारो तरफ से प्रियता की प्राप्ति कराने वाला होता है।
उरराभिमुख या पूर्वाभिमुख सुखपूर्वक बैठकर वार्षिक याभितिजामा को इदय में रखकर विहित करना चाहिये। फिर दन्तपावन को धोकर पवित्र स्थान में छोड़ देना चाहिये ।
जिस तरफ से भक्षण किये थे उसी तरफ से प्रशान्त दिशा में जाकर दन्तधावन गिरे तो शुभ और खड़ा हो जाय तो अतिशुभ और इससे उलटा गिरे तो अशुभ होता है। साथ हो खड़ा होकर गिर जाय तो मिष्ठान का लाभ कराता है।
Krishjan
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