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बृहत्संहिता • अध्याय 85 • श्लोक 6
नीपेऽर्धाप्तिः करवीरेऽनलब्धिर्भाण्डीरे स्यादन्नमेवं प्रभूतम् । शम्यां शत्रूनपहन्त्यर्जुने च श्यामायां च द्विषतामेव नाशः ॥
नौम के वृक्ष का दन्तपावन करे तो धन का लाभ, करवीर (कनेर) के वृछ का दन्तधावन करे तो अत्र का लाभ, भाण्डौर वृक्ष का दन्तधावन करे तो इसी तरह अधिक अत्र का लाभ, शमी वृक्ष का दन्तपावन करे तो शत्रुओं को मारने वाला, अर्जुन वृक्ष का दन्तधावन करे तो भी शत्रुओं का नाश करने वाला और श्यामा के वृक्ष का दन्तपावन करे तो भी शत्रु को ही मारने वाला होता है।
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