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बृहत्संहिता • अध्याय 85 • श्लोक 9
अभिमुखपतितं प्रशान्तदिक्स्थं शुभमतिशोभनमूर्ध्वसंस्थितं यत् । अशुभकरमतोऽन्यथा प्रदिष्टं स्थितपतितं च करोति मृष्टमन्नम् ॥
जिस तरफ से भक्षण किये थे उसी तरफ से प्रशान्त दिशा में जाकर दन्तधावन गिरे तो शुभ और खड़ा हो जाय तो अतिशुभ और इससे उलटा गिरे तो अशुभ होता है। साथ हो खड़ा होकर गिर जाय तो मिष्ठान का लाभ कराता है।
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