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बृहत्संहिता • अध्याय 85 • श्लोक 4
लक्ष्मीः शिरीषे च तथा करने प्लक्षेऽर्थसिद्धिः समभीप्सिता स्यात् । मान्यत्वमायाति जनस्य जात्यां प्राधान्यमश्वत्यतरी वदन्ति ॥
शिरीष और करन वृक्ष का दन्तधावन करे तो लक्ष्मी की प्राप्ति, पाकड़ के वृक्ष का दन्तधावन करे तो अभीष्ट अर्थ की सिद्धि, चमेली वृक्ष का दन्तधावन करे तो मान का लाभ और पीपल के वृक्ष का दन्तधावन करे तो प्रधानता की प्राप्ति होती है।
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