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बृहत्संहिता • अध्याय 85 • श्लोक 1
वल्लीलतागुल्मतरुप्रभेदैः स्युर्दन्तकाष्ठानि सहस्रशो यैः। फलानि वाध्यान्यथ तत्प्रसङ्गो मा भूदतो वच्यच कामिकानि ॥
बल्ली, लता, गुल्म और वृक्षों के भेद से हजारों प्रकार के दतलून (दातून) होते हैं। जिनसे फल कहे जाते हैं, उनके प्रसंग को अधिक न बढ़ाकर केवल अभीष्ट फल देने वाले दतवन को कहते हैं।
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