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बृहत्संहिता • अध्याय 85 • श्लोक 5
आरोग्यमायुर्वदरीबृहत्योरैश्वर्यवृद्धिः खदिरे सबिल्वे । 'द्रव्याणि चेष्टान्यतिमुक्तके स्युः प्राप्नोति तान्येव पुनः कदम्बे ॥
बेर और कटेरी वृक्ष का दन्तधावन करे तो आरोग्य और दीर्घायु का लाभ, खैर और बेल वृक्ष का दन्तधावन करे तो ऐश्वर्य को वृद्धि, तेंदुआ (तिनिस) वृक्ष का दन्तधावन करे तो अभीष्ट द्रव्यों का लाभ और कदम्ब वृक्ष का दन्तधावन करे तो भी अभीष्ट द्रव्यों का लाभ होता है।
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