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अध्याय 45 — अथ खञ्जनकलक्षणाध्यायः

बृहत्संहिता
16 श्लोक • केवल अनुवाद
खञ्जन नामक पक्षी के प्रथम दर्शन होने पर गर्ग आदि मुनियों ने जो फल कहे हैं, उनको मैं यहाँ पर कहता हूँ।
स्थूल शरीर बाला, उत्रत और काले गले वाला खडान पक्षी भद्रसंज्ञक है, यदि यह दिखाई दे तो शुभ होता है। जिसका मुख से लेकर कण्ठ तक काला हो, वह खजन पक्षी सम्पूर्णसंज्ञक है, यह सम्पूर्ण इच्छाओं को पूर्ण करता है।
जिसके गले में काली बिन्दी तथा घेत कपोल हो यह रिक्तसंज्ञक खजन सब शून्य करता है और पीला खञ्जन गोपीत संज्ञक है, यदि यह दिखाई दे तो क्लेश करता है।
मधुर तथा सुगन्धयुत फल और फूलों से युत वृक्ष पर, पवित्र जलाशय में हाथो, घोड़ा मा सर्षों के मस्तक पर, देवालय, फुलवाड़ी या कोठे पर
गाय, गोठ, सज्जनों के समागम स्थान, पह, विवाह आदि उत्सव स्थान, राजा या ब्राह्मणों के समीप, हाथी, घोड़ा, छत्र, ध्वना, चामर आदि पर, सुवर्ण के समीप,
कमल, नीलकमल, पूजित और लिपे हुये स्थान पर, दही के पात्र या धान्य के ढेर पर खान पक्षी दिखाई दे तो देखने पाले का शुभ होता है।
यदि कीचड़ में बैठा हुआ खान दिखाई दे तो स्वादिष्ट भोजन मिलता है। गोबर पर दिखाई दे तो दूध, दही, पूत काफी मिलता है। दूब पर दिखाई दे तो यत्रलाभ होता है और गाड़ी पर दिखाई दे तो देश का नाश होता है।
घर की छत पर खञ्जन दिखाई दे तो धन का नारा, चमड़े की बनी हुई छेद वाली बस पर दिखाई दे तो बन्धन, अपवित्र स्थान पर दिखाई दे तो रोग, छाग या भेड़ के ऊपर दिखाई दे तो बहुत जल्दी मित्रसमागम होता है।
भैस, ऊँट, गदा, श्मशान, घर का कोना, मिट्टी का ढेला, अटारी, पेरे की दीवाल, भस्म और केश पर यदि खान दिखाई दे तो मरण और रोगभयरूप अशुभ फल होता है।
दोनों पंखों को हिलाता हुआ खञ्जन दिखाई दे तो शुभ नहीं है। नदी में (कोई-कोई 'वारिवाहस्य: पानी जाने वाले प्रदेश में' ऐसा पाठ मानते है) पानी पीता हुआ दिखाई दे तो शुभ होता है। यदि सूर्योदय काल में खान दिखाई दे तो शुभ और अस्त काल में दिखाई दे तो अशुभ फल देने वाला हत्ता है।
नीराजन करने के बाद राजा जिस दिशा में जाते हुये खान को देखे, उस दिशा में गमन करने से शत्रु शीघ्र ही वश में हो जाता है।
जिस स्थान पर खजन मैथुन करता है, उसके नीचे निधि (खजाना), जहाँ पर यमन करता है उसके नीचे कांच और जहाँ पर टट्टी करता है उसके नीचे कोयला होता है। इस कौतुक को हटाने के लिये (परीक्षा के लिए) वहाँ की पृथ्यो खोदे ।
यदि मरा हुआ खान दिखाई दे तो देखने वाले की मृत्यु, विकल दिखाई दे तो देखने वाले को वैकल्य और रुग्ण दिखाई दे तो देखने वाले को रोग होता है। यदि सम्मुख में होकर घर में प्रवेश करता हुआ दिखाई दे तो धन करने वाला और आकाश में उड़ता हुआ दिखाई दे तो बन्धु-समागम होता है।
राजा शुभ प्रदेश में शुभ लक्षणयुत खञ्जन पक्षी की भी देखकर सुगन्धयुत पुष्य और पूपयुत अर्थ देवे। इस तरह करने से सम्मानित शुभ फल की वृद्धि होती है।
अशुभ फल देने वाले खान को देख कर भी राजा यदि ब्राह्मण, गुरु, सज्जन और देवताओं के पूजन में निरत हो जाय एवं सात दिन तक यदि मांस-भक्षण न करे तो उसे किसी प्रकार का अशुभ फल प्राप्त नहीं होता।
खनन के प्रथम दर्शन का फल एक वर्ष में होता है। बाद में प्रति दिन दर्शन का फल उसी दिन प्राप्त होता है। दिशा, स्थान, शरीराकृति, लग्न, नक्षत्र, शान्त और दीप्त दिशा आदि के अनुसार शुभाशुभ देखकर अपनी बुद्धि से फल कहना चाहिये ।
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