अशुभमपि विलोक्य खञ्जनं द्विजकुरुसाधुसुरार्चने रतः । न नृपतिरशुभं समाप्नुयात्र यदि दिनानि च सप्त मांसभुक् ॥
अशुभ फल देने वाले खान को देख कर भी राजा यदि ब्राह्मण, गुरु, सज्जन और देवताओं के पूजन में निरत हो जाय एवं सात दिन तक यदि मांस-भक्षण न करे तो उसे किसी प्रकार का अशुभ फल प्राप्त नहीं होता।
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