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बृहत्संहिता • अध्याय 45 • श्लोक 8
गृहपटलेऽर्थभ्रंशो बधे बन्योऽशुचौ भवति रोगः । पृष्ठे त्वजाविकानां प्रियसङ्गममावहत्याशु ॥
घर की छत पर खञ्जन दिखाई दे तो धन का नारा, चमड़े की बनी हुई छेद वाली बस पर दिखाई दे तो बन्धन, अपवित्र स्थान पर दिखाई दे तो रोग, छाग या भेड़ के ऊपर दिखाई दे तो बहुत जल्दी मित्रसमागम होता है।
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