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बृहत्संहिता • अध्याय 45 • श्लोक 16
आवर्षात् प्रथमे दर्शन फलं प्रतिदिनं तु दिनशेषात् । दिक्स्थानमूर्तिलग्नर्क्षशान्तदिप्तादिभिश्चोहाम् ॥
खनन के प्रथम दर्शन का फल एक वर्ष में होता है। बाद में प्रति दिन दर्शन का फल उसी दिन प्राप्त होता है। दिशा, स्थान, शरीराकृति, लग्न, नक्षत्र, शान्त और दीप्त दिशा आदि के अनुसार शुभाशुभ देखकर अपनी बुद्धि से फल कहना चाहिये ।
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