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बृहत्संहिता • अध्याय 45 • श्लोक 1
अथ खञ्जनकलक्षणाध्यायो व्याख्यायते। तत्रादावेवागमप्रदर्शनार्थमाह- खञ्चनको नामायं यो विहगस्तस्य दर्शन प्रथमे। प्रोक्तानि यानि मुनिभिः फलानि तानि प्रवक्ष्यामि ॥
खञ्जन नामक पक्षी के प्रथम दर्शन होने पर गर्ग आदि मुनियों ने जो फल कहे हैं, उनको मैं यहाँ पर कहता हूँ।
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