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बृहत्संहिता • अध्याय 45 • श्लोक 12
तस्मिन्निधिर्भवति मैथुनमेति यस्मिन् यस्मिंस्तु छर्दयति तत्र तलेऽस्ति काचम्। अङ्गारमप्युपदिशन्ति तत्कौतुकापनयनाय खनेद् पुरीषणेऽस्य धरित्रीम् ॥
जिस स्थान पर खजन मैथुन करता है, उसके नीचे निधि (खजाना), जहाँ पर यमन करता है उसके नीचे कांच और जहाँ पर टट्टी करता है उसके नीचे कोयला होता है। इस कौतुक को हटाने के लिये (परीक्षा के लिए) वहाँ की पृथ्यो खोदे ।
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