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बृहत्संहिता • अध्याय 45 • श्लोक 11
नीराजने निवृत्ते यया दिशा खञ्जनं नृपो यान्तम्। पश्येत्तया गतस्य क्षिप्रमरातिर्वशमुपैति ॥
नीराजन करने के बाद राजा जिस दिशा में जाते हुये खान को देखे, उस दिशा में गमन करने से शत्रु शीघ्र ही वश में हो जाता है।
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