Krishjan
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अध्याय 3 — तीसरा अध्याय
चाणक्य नीति
21 श्लोक • केवल अनुवाद
इस दुनिया में ऐसा किसका घर है, जिस पर कोई कलंक नहीं, वह कौन है। जो रोग और दुख से मुक्त है। सदा सुख किसको रहता है।
मनुष्य के कुल की ख्याति उसके आचरण से होती है, मनुष्य के बोल चाल से उसके देश की ख्याति बढ़ती है, मान सम्मान उसके प्रेम को बढ़ता है, एवं उसके शरीर का गठन उसके भोजन से बढ़ता है।
लड़की का ब्याह अच्छे खानदान में करना चाहिए। पुत्र को अच्छी शिक्षा देनी चाहिए, शत्रु को आपत्ति और कष्टों में डालना चाहिए एवं मित्रों को धर्म कर्म में लगाना चाहिए।
एक दुर्जन और एक सर्प में यह अंतर है कि साँप तभी डंक मारेगा, जब उसकी जान को खतरा हो लेकिन दुर्जन पग पग पर हानि पहुंचाने की कोशिश करेगा।
राजा लोग अपने आस पास अच्छे कुल के लोगो को इसलिए रखते है, क्योंकि ऐसे लोग ना आरम्भ में, ना बीच में और ना ही अंत में साथ छोड़कर जाते है।
जब प्रलय का समय आता है तो समुद्र भी अपनी मर्यादा छोड़कर किनारों को छोड़ अथवा तोड़ जाते है, लेकिन सज्जन पुरुष प्रलय के सामान भयंकर आपत्ति अवं विपत्ति में भी आपनी मर्यादा नहीं बदलते।
मूर्खों के साथ मित्रता नहीं रखनी चाहिए उन्हें त्याग देना ही उचित है, क्योंकि प्रत्यक्ष रूप से वे दो पैरों वाले पशु के सामान हैं, जो अपने धारदार वचनो से वैसे ही हदय को छलनी करता है जैसे अदृश्य काँटा शारीर में घुसकर छलनी करता है।
रूप और यौवन से सम्पन्न तथा कुलीन परिवार में जन्मा लेने पर भी विद्याहीन पुरुष पलाश के फूल के समान है जो सुन्दर तो है लेकिन खुशबु रहित है।
कोयल की सुन्दरता उसके गायन में है। एक स्त्री की सुन्दरता उसके अपने परिवार के प्रति समर्पण मे है। एक बदसूरत आदमी की सुन्दरता उसके ज्ञान मे है, तथा एक तपस्वी की सुन्दरता उसकी क्षमाशीलता में है।
कुल की रक्षा के लिए एक सदस्य का बलिदान दें, गाव की रक्षा के लिए एक कुल का बलिदान दें, देश की रक्षा के लिए एक गाव का बलिदान दें,आत्म की रक्षा के लिए देश का बलिदान दें।
जो उद्यमशील हैं, वे गरीब नहीं हो सकते, जो हरदम भगवान को याद करते है उन्हे पाप नहीं छू सकता। जो मौन रहते है वो झगड़ों में नहीं पड़ते। जो जागृत रहते है वो निर्भय होते है।
आत्याधिक सुन्दरता के कारण सीताहरण हुआ, अत्यंत घमंड के कारण रावण का अंत हुआ, अत्यधिक दान देने के कारन राजा बाली को बंधन में बंधना पड़ा, अतः सर्वत्र अति को त्यागना चाहिए।
शक्तिशाली लोगों के लिए कौन सा कार्य कठिन है व्यापारिओं के लिए कौन सा जगह दूर है, विद्वानों के लिए कोई देश विदेश नहीं है, मधु भाषियों का कोई शत्रु नहीं।
जिस तरह सारा वन केवल एक ही पुष्प अवं सुगंध भरे वृक्ष से महक जाता है, उसी तरह एक ही गुणवान पुत्र पुरे कुल का नाम बढाता है।
जिस प्रकार केवल एक सुखा हुआ जलता वृक्ष सम्पूर्ण वन को जला देता है, उसी प्रकार एक ही कुपुत्र सारे कुल के मान, मर्यादा और प्रतिष्ठा को नष्ट कर देता है।
विद्वान एवं सदाचारी एक ही पुत्र के कारण सम्पूर्ण परिवार वैसे ही खुशहाल रहता है, जैसे चन्द्रमा के निकालने पर रात्रि जगमगा उठती है।
ऐसे अनेक पुत्र किस काम के जो दुःख और निराशा पैदा करे। इससे तो वह एक ही पुत्र अच्छा है जो सम्पूर्ण घर को सहारा और शान्ति प्रदान करें।
पांच साल तक पुत्र को लाड एवं प्यार से पालन करना चाहिए, दस साल तक उसे छड़ी की मार से डराए। लेकिन जब वह १६ साल का हो जाए तो उससे मित्र के समान वयवहार करें।
वह व्यक्ति सुरक्षित रह सकता है जो नीचे दी हुई परिस्थितियां उत्पन्न होने पर भाग जाए। १. भयावह आपदा २. विदेशी आक्रमण ३. भयंकर अकाल ४. दुष्ट व्यक्ति का संग
जो व्यक्ति निम्नलिखित बातें अर्जित नहीं करता वह बार बार जन्म लेकर मरता है। १. धर्म २. अर्थ ३. काम ४. मोक्ष
धन की देवी लक्ष्मी स्वयं वहां चली आती है जहाँ - १. मूर्खों का सम्मान नहीं होता २. अनाज का अच्छे से भंडारण किया जाता है ३. पति, पत्नी में आपस में लड़ाई बखेड़ा नहीं होता है
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