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चाणक्य नीति • अध्याय 3 • श्लोक 1
कस्य दोषः कुलेनास्ति व्याधिना के न पीडितः । व्यसनं के न संप्राप्तं कस्य सौख्यं निरन्तरम् ।।
इस दुनिया में ऐसा किसका घर है, जिस पर कोई कलंक नहीं, वह कौन है। जो रोग और दुख से मुक्त है। सदा सुख किसको रहता है।
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