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चाणक्य नीति • अध्याय 3 • श्लोक 9
कोकिलानां स्वरो रूपं नारीरूपं पतिव्रतम् । विद्यारूपं कुरूपाणांक्षमा रूप रपस्विनाम् ॥
कोयल की सुन्दरता उसके गायन में है। एक स्त्री की सुन्दरता उसके अपने परिवार के प्रति समर्पण मे है। एक बदसूरत आदमी की सुन्दरता उसके ज्ञान मे है, तथा एक तपस्वी की सुन्दरता उसकी क्षमाशीलता में है।
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