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चाणक्य नीति • अध्याय 3 • श्लोक 2
आचारः कुलमाख्याति देशमाख्याति भाषणम् । सम्भ्रमः स्नेहमाख्यातिवपुराख्याति भोजनम् ।।
मनुष्य के कुल की ख्याति उसके आचरण से होती है, मनुष्य के बोल चाल से उसके देश की ख्याति बढ़ती है, मान सम्मान उसके प्रेम को बढ़ता है, एवं उसके शरीर का गठन उसके भोजन से बढ़ता है।
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