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चाणक्य नीति • अध्याय 3 • श्लोक 11
उद्योगे नास्ति दारिट्य जपतो नास्ति पातकम्। मौनेनकलहोनास्ति नास्ति जागरितो भयम् ।।
जो उद्यमशील हैं, वे गरीब नहीं हो सकते, जो हरदम भगवान को याद करते है उन्हे पाप नहीं छू सकता। जो मौन रहते है वो झगड़ों में नहीं पड़ते। जो जागृत रहते है वो निर्भय होते है।
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