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अध्याय 39 — अथ निर्घातलक्षणाध्यायः

बृहत्संहिता
5 श्लोक • केवल अनुवाद
जब पवन से टकरा कर पवन आकाश से पृथ्वी पर गिरता है, उस समय उसके गिरने से जो शब्द होता है, उसका नाम 'निर्घात' है। यदि वह सूर्याभिमुख स्थित पक्षियों के शब्द से युत हो तो दुष्ट फल देने वाला होता है।
यदि सूर्योदय काल में निर्मात हो तो अधिकरणिक, राजा, धनी, शूर, त्री, व्यापारी और बेश्याओं का नाश करता है। यदि दिन के प्रथम प्रहर में निर्घात हो तो छाग, आविक ( भेड़ पालने बाले), शूद्र और पुरवासियों का नाश करता है।
द्वितीय प्रहर में राजा, सेवक और ब्राह्मणों को पोड़ा होती है। तृतीय प्रहर में व्यापारी और मेप का नाश करता है।
द्वितीय प्रहर में पिसाचसमूहों को पीड़ित करता है। तृतीय प्रहर में हाथों और घोड़ों का नाश करता है।
यदि रात्रि के चतुर्थ प्रहर में निर्यात हो तो गमन करने वालों का नाश करता है तथा जिस दिशा में भग्न भाण्ड की तरह भयङ्कर शब्द जाता है, उस दिशा का भी नास करता है।
Krishjan
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