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बृहत्संहिता • अध्याय 39 • श्लोक 4
अस्तं याते नीचान् प्रथमे यामे निहन्ति सस्यानि । रात्रौ द्वितीययामे पिशाचसद्धान् निपीडयति ॥
द्वितीय प्रहर में पिसाचसमूहों को पीड़ित करता है। तृतीय प्रहर में हाथों और घोड़ों का नाश करता है।
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