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बृहत्संहिता • अध्याय 39 • श्लोक 3
आमध्याह्राद्राजोपसेविनो ब्राह्मणांश्च पीडयति । वैश्यजलदांस्तृतीये चौरान् प्रहरे चतुर्थे तु ॥
द्वितीय प्रहर में राजा, सेवक और ब्राह्मणों को पोड़ा होती है। तृतीय प्रहर में व्यापारी और मेप का नाश करता है।
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