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बृहत्संहिता • अध्याय 39 • श्लोक 2
वेलावशेन फलमाह- अकॉदयेऽधिकरणिकनृपधनियोधाङ्गनावणिग्वेश्याः । आप्रहरांशेऽ जाविकमुपहन्याच्छूद्रपौरांच ॥
यदि सूर्योदय काल में निर्मात हो तो अधिकरणिक, राजा, धनी, शूर, त्री, व्यापारी और बेश्याओं का नाश करता है। यदि दिन के प्रथम प्रहर में निर्घात हो तो छाग, आविक ( भेड़ पालने बाले), शूद्र और पुरवासियों का नाश करता है।
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