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अध्याय 18 — अथ शशिग्रहसमागमाध्यायः
बृहत्संहिता
6 श्लोक • केवल अनुवाद
यदि नक्षत्र या ग्रहों के निकटवर्ती होकर चन्द्रमा प्रदक्षिण क्रम से उत्तर तरफ होकर गमन करे तो राजाओं का शुभ और दक्षिण तरफ होकर मंथन करे तो अशुभ करने वाला होता है।
यदि बुध के उत्तर तरफ होकर चन्द्र गनन भने हो पुरषासी राजाओं की विजय, सुभिक्ष, धान्यों की वृद्धि, लोगों को आरिक और राजाओं के वेल की वृद्धि होती
यदि शुक्र के उत्तर तरफ होकर चन्द्र गमन करे तो कोश, हाथी और घोड़ों की वृद्धि, धनुर्धारी और बनेको इच्छा रखने वालों को विजय तथा धान्यों को अच्छी उत्पति होती है।
यदि शरैबार के उत्तर तरफ होकर बद्र को तो पुरणामी और एकैओं को विष तथा शक, और देसी मनुष्य हर्षपुन होते हैं।
जिन नक्षत्रों या ग्रहों के उत्तर तरफ होकर उत्पातरहित चन्द्र गमन करे उन नक्षत्रों या ग्रहों के द्रव्यों की पुष्टि और दक्षिण तरफ होकर गमन करे तो हानि करता है।
ग्रहों के उत्तरगत चन्द्र के जो फल कहे गये हैं, उनके विपरीत फल ग्रहों के दक्षिणगत चन्द्र के होते हैं। इस तरह चन्द्र के साथ ग्रहों या नक्षत्रों के रहने को समागम, रवि के साथ अस्त और कुजादि ग्रहों के परस्पर संयोगादि को युद्ध कहते हैं।
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