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बृहत्संहिता • अध्याय 18 • श्लोक 5
येषामुदग्गच्छति भग्रहाणां प्रालेयरश्मिर्निरुपद्रवश्च । तद्रव्यपौरेतर भक्तिदेशान् पुष्णाति याम्येन निहन्ति तानि ॥
जिन नक्षत्रों या ग्रहों के उत्तर तरफ होकर उत्पातरहित चन्द्र गमन करे उन नक्षत्रों या ग्रहों के द्रव्यों की पुष्टि और दक्षिण तरफ होकर गमन करे तो हानि करता है।
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