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बृहत्संहिता • अध्याय 18 • श्लोक 2
उत्तरतः स्वसुतस्य शशाङ्गः पौरजयाय सुभिकरख । सस्यचर्य कुरुते जनहार्दि कोशचचं च नराधिपतीनाम् ॥
यदि बुध के उत्तर तरफ होकर चन्द्र गनन भने हो पुरषासी राजाओं की विजय, सुभिक्ष, धान्यों की वृद्धि, लोगों को आरिक और राजाओं के वेल की वृद्धि होती
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