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बृहत्संहिता • अध्याय 18 • श्लोक 1
भानां यथासम्भवमुत्तरेण यातो प्रहाणां यदि वा शशाङ्कः। प्रदक्षिणं तच्छुभदं नृपाणां याम्येन यातो न शिवः शशाङ्कः ॥
यदि नक्षत्र या ग्रहों के निकटवर्ती होकर चन्द्रमा प्रदक्षिण क्रम से उत्तर तरफ होकर गमन करे तो राजाओं का शुभ और दक्षिण तरफ होकर मंथन करे तो अशुभ करने वाला होता है।
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