ग्रहों के उत्तरगत चन्द्र के जो फल कहे गये हैं, उनके विपरीत फल ग्रहों के
दक्षिणगत चन्द्र के होते हैं। इस तरह चन्द्र के साथ ग्रहों या नक्षत्रों के रहने को समागम,
रवि के साथ अस्त और कुजादि ग्रहों के परस्पर संयोगादि को युद्ध कहते हैं।
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