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अध्याय 49 — अथ पट्टलक्षणाध्यायः
बृहत्संहिता
8 श्लोक • केवल अनुवाद
प्राचीन आचार्यों ने विस्तारपूर्वक जो पट्टों (नरेन्द्र-मुकुटों) का लक्षण कहा है, यहाँ पर सकल अर्थ से युत उसी को संक्षेप करके कहते हैं।
मध्य में आठ अद्भुत विस्तार बाला मुकुट राजा का सात अद्भुत विस्तार बाला रानी का, छः अद्भुत विस्तार बाला मुराज का और चार अमुल
विस्तार माला मेनापति का शुभ करने पाला होता है तथा दो अद्भुत विस्तारला मुकुट प्रसादकता है, यह मुकुट राज्य किसी को भी पहना सकता है।
सब पूर्वोक्त मुकुट के विस्तार से द्विगुणित दैर्ध्य और विस्तार का आधा पार्श्व का विस्तार होना चाहिये। ये शुद्ध सुवर्ण के बने हों तो श्रेयवृद्धिकारक होते हैं।
पाँच शिखा बाला राजा के लिये, तीन शिखा वाला युवराज तथा रानी के लिये और एक शिखा बाला मुकुट सेनापति के लिये शुभकारी होता है। प्रसादपट्ट विना शिखा कर बनाना चाहिये ।
यदि मुकुट के बनाये हुये पत्र अनायास फैल जायें तो राजा की वृद्धि और विजय होती है तथा प्रजा को सुख-सम्पत्ति प्राप्त होती है।
यदि बनाते हुये मुकुट के मध्य में छिद्र हो जाय तो प्राण-राज्य दोनों का नाश करता है। मध्य में फट जाय तो उसका त्याग कर देना चाहिये तथा दोनों पार्थ में फटा हो तो विप्नकारी होता है।
यदि मुकुट में अशुभ लक्षण दिखाई दे तो शास्त्र को जानने वाले पण्डित राजा को शान्ति कराने का आदेश करें तथा शुभ लक्षणयुत मुकुट राजा-राज्य दोनों की वृद्धि के लिये होता है।
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